दुनिया में न्यूक्लियर हथियारों के फैलाव और आधुनिकीकरण में खतरनाक हद तक बढ़ौतरी हो रही है तथा इसके लिए विभिन्न देशों द्वारा नई रणनीति बनाई जा रही है। अमरीका और रूस के बीच 50 वर्ष पूर्व न्यूक्लियर हथियारों के परिसीमन और उन्हें समाप्त करने सम्बन्धी की गई संधि, जिसे ‘न्यू स्ट्रैटेजिक आम्र्स रिडक्शन ट्रीटी’ (न्यू स्टार्ट) कहा जाता है, 2021 में 5 वर्ष के लिए बढ़ाने के बाद अब 5 फरवरी को समाप्त हो चुकी है तथा इसेे आगे बढ़ाने की दिशा में कोई बात नहीं की जा रही। 

हालांकि, यह संधि किए जाने के बाद काफी न्यूक्लियर हथियार समाप्त कर दिए गए थे, परंतु अब नए हालात में अमरीका और रूस भी और न्यूक्लियर बम बनाना चाहते हैं, सऊदी अरब और तुर्की भी इसके लिए इच्छुक हैं तथा यूरोप में भी अब यह अहसास बढ़ रहा है कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए और न्यूक्लियर हथियार बनाने चाहिएं। यह बात ध्यान देने योग्य है कि अमरीका अपनी लम्बी दूरी की मिसाइल परीक्षण प्रणाली पर अरबों डॉलर रकम खर्च कर चुका है परंतु इसके बावजूद उसे टिकाऊ सुरक्षा प्राप्त नहीं हो सकी और अभी तक अमरीका हथियारों के निर्माण और फिर उन्हें समाप्त करने पर करदाताओं के 10 ट्रिलियन डॉलर खर्च कर चुका है। यह इतनी रकम है कि इससे गूगल, एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट का ज्यादातर हिस्सा खरीदा जा सकता था।

इस समय स्थिति यह है कि डोनाल्ड ट्रम्प के अंतर्गत अमरीका कोई संधि नहीं करना चाहता और यह बात तो रूस के अनुकूल ही है कि वह न्यूक्लियर हथियार बनाए। परंतु इसमें हानि किसकी है? इसमें हानि सारी दुनिया की है कि इतना धन खर्च करके न्यूक्लियर हथियार बनाने के बाद जिस स्थान पर उनका परीक्षण किया जाएगा, उस स्थान और उसके आसपास के लोगों का भारी नुकसान होगा। पिछली बार रूस ने जहां न्यूक्लियर हथियारों का परीक्षण किया था, उसके आसपास रहने वाले लोगों को वैसी ही समस्याओं से जूझना पड़ा था, जैसी समस्याओं और बीमारियों का सामना चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र में लीकेज के समय लोगों को करना पड़ा था। यदि कोई देश ऐसा करने के लिए भड़क उठे तो यही समस्याएं पैदा होंगी। कोल्ड वॉर के बाद अब पहली बार देश अपने हथियारों का जखीरा और इस्तेमाल के लिए तैयार वॉरहैड (बम) बढ़ा रहे हैं। 2026 की शुरुआत तक 9 न्यूक्लियर हथियार वाले देशों के पास लगभग 12,187 वॉरहैड थे और इनकी बढ़ती संख्या को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

न्यूक्लियर हथियारों से सम्पन्न लगभग सभी 9 देश अपने वर्तमान मौजूदा हथियारों को अपग्रेड करने के साथ-साथ इनमें नए एवं अधिक उन्नत संस्करण वाले हथियारों की वृद्धि कर रहे हैं। हालांकि इसराईल के पास भी काफी न्यूक्लियर हथियार हैं परंतु इनकी घोषणा न करने के कारण इसराईल को इनमें नहीं गिना जाता। ये देश इस्तेमाल के लिए तैयार हथियारों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ बैलिस्टिक मिसाइलों पर तैनात या बॉम्बर बेस पर स्टोर किए गए इस्तेमाल के लिए तैयार न्यूक्लियर हथियारों की संख्या बढ़ा रहे हैं जो इस समय बढ़कर लगभग 9,745 हो गई है जो वर्ष 2024 से 141 अधिक है। इस समय अमरीका व रूस के पास ही दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत न्यूक्लियर हथियार हैं। चीन भी अपने हथियारों का भंडार काफी बढ़ाने के अलावा अपने एडवांस्ड डिलीवरी सिस्टम की टैस्टिंग भी कर रहा है। 

इन हालात में ग्लोबल न्यूक्लियर रूलबुक कमजोर हो रही है और उक्त संधि चुनौतियों का सामना कर रही है। सैन्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडल ईस्ट तनाव सहित बढ़ते झगड़ों के कारण न्यूक्लियर हथियारों के इस्तेमाल का खतरा पिछले एक दशक के दौरान इस समय अपने सबसे ऊंचे स्तर पर है और इस होड़ के फैलने का खतरा चिंताजनक मोड़ पर है। इसका कारण यह है कि दुनिया के वर्तमान हालात में अधिक देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए न्यूक्लियर हथियार बनाने की कोशिश कर सकते हैं।आज ए.आई. (कृत्रिम बुद्धिमता) के परिणामस्वरूप भी तकनीकी खतरे बढ़ गए हैं और नए हथियारों के हाइपरसोनिक डिलीवरी सिस्टम के इंटीग्रेशन से सैन्य मामलों पर फैसले लेने के लिए उपलब्ध समय कम हो रहा है, जिससे अचानक या तेजी से न्यूक्लियर हमले का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में इस संंधि का नवीकरण न किए जाने की स्थिति में दुनिया को न्यूक्लियर हथियारों से होने वाली एक और तबाही के लिए तैयार रहना होगा।  

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31