राजनांदगांव। चांदनी, गुडिय़ा और बबलू के माता-पिता कई बार मिलकर बैठते हैं। आजकल बहुत आना-जाना नहीं है तो उन्हीं से मिलते हैं जिनके बारे में जानते हैं कि वे सावधानी बरत रहे हैं। मुंह पर मॉस्क लगाकर बाहर निकलते हैं। किसी से मिलते हैं तो 6-8 फुट दूर रहकर बात करते हैं। वापस घर आते हैं तो साबुन से हाथ-मुंह धोते हैं। किसी से मिलते हैं तो कोशिश करते हैं कि खुले में मिलें, बंद कमरे में नहीं। ऐसे लोगों से मिलने से सावधानी भी रहती है और अकेलापन भी इतना नहीं खलता। बेहतर स्वास्थ्य के लिए सतर्कता की सीख देते ये वाक्य मौसम बदले, बदले सूझ शीर्षक वाली उस प्रेरक कहानी का हिस्सा है, जो समाजसेवी संस्था सेंटर फॉर लर्निंग रिसोर्सेस (सीएलआर) द्वारा सजग नाम से तैयार की गई है और जो आज गांव-गांव में सुनी-सुनाई जा रही है। इस कहानी में साफ तौर पर बताया गया है कि, थोड़े से समय में कितना कुछ बदल गया है। महामारी के आने से ये जरूरी हो गया है कि सब सावधानी बरतें। अपने और दूसरों, दोनों की भलाई के लिए। 10 प्रतिशत लोग करते हैं तो बहुत फर्क नहीं पड़ता पर 60, 70 या 80 प्रतिशत करें तो बीमारी के फैलने पर बड़ी जल्दी काबू आ जाए। हम जैसा करते आए हैं, ये सब उससे अलग तो है पर ये समय की जरुरत है। यानी पालकों के लिए बनाई गई सजग की 27वीं कड़ी भी कोरोना महामारी के दौर में हिम्मत हारने के बजाय समझदारी के साथ हौसला रखकर आगे बढऩे का संदेश दे रही है। इस आडियो संदेश में बदले मौसम में बच्चों के बेहतर लालन-पालन के उपाय सुझाए गए हैं। संस्था सेंटर फॉर लर्निंग रिसोर्सेस (सीएलआर) द्वारा समाजसेवा की दिशा में समय-समय पर विभिन्न उल्लेखनीय कार्य किए जाते हैं। इसी क्रम में कुछ महीनों से प्रेरक कहानियों की श्रृंखला का आडियो प्रसारण किया जा रहा है। सीएलआर ने सजग नाम से पालकों के लिए संक्षिप्त आडियो संदेशों की श्रृंखला तैयार की है, इन आडियो संदेशों में माता-पिता के लिए सरल सुझाव दिए गए हैं, ताकि वह अपने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अच्छा वातावरण तैयार कर सकें। सजग के संक्षिप्त आडियो संदेशों की श्रृंखला की 27वीं कड़ी मौसम बदले, बदले सूझ विषय पर केंद्रित है। यह ऑडियो संदेश पालकों को सकारात्मक ऊर्जा तो प्रदान करते ही हैं, साथ ही उन्हें यह ज्ञान भी मिलता है कि बच्चों के समग्र विकास हेतु कठिन परिस्थितियों में भी वह क्या बेहतर कर सकते हैं। सजग आडियो कार्यक्रम का क्रियान्वयन महिला एवं बाल विकास विभाग तथा सीएलआर के द्वारा किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में यूनिसेफ और एचसीएल फाउंडेशन भी सहयोग कर रहे हैं। इस तरह यह प्रेरक ऑडियो संदेश सुदूर अंचल में रह रहे पालकों तक भी सहजता से पहुंचाए जा रहे हैं। इसके लिए व्हाट्सएप व फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म की भी मदद ली जाती है। इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने बताया, सजग नाम का यह आडियो क्लिप डायरेक्ट्रेट से प्रत्येक सोमवार की सुबह व्हाट्सएप के जरिए जिला अधिकारियों को भेजा जाता है। जिला अधिकारियों से परियोजना अधिकारी, परियोजना अधिकारी से सुपरवाइजर और सुपरवाइजर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तक पहुंचता है। इसके बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इन संदेशों को पालकों को सुनाती हैं, जिन पालकों के पास व्हाट्सएप या स्मार्ट फोन जैसी सुविधाएं नहीं हैं, उनके घर तक जाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं पालकों को संदेश सुनाकर उनसे चर्चा भी करती हैं। वहीं सीएलआर की दुर्ग संभाग कार्यक्रम अधिकारी अमृता भोईर ने बताया, इन दिनों आडियो संदेशों की 27वीं कड़ी का प्रसारण किया जा रहा है जिससे गांव-गांव में यह प्रेरक ऑडियो संदेश सुना जा रहा है। कोरोना संक्रमण जैसे कठिन समय में भी सजग कार्यक्रम पूरे छत्तीसगढ़ में क्रियान्वित किया जा रहा है और इसके ऑडियो संदेशों की श्रृंखला पूरे 35,000 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रयासों से लगभग 5 लाख परिवारों तक पहुंचाए जा रहे हैं। यह ऑडियो कार्यक्रम छोटे बच्चों की बेहतरी के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों का एक हिस्सा है।

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