ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है. दिल्ली पुलिस ने उन्हें शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड और एक जमानतदार जमा करने का निर्देश दिया था. नेहा ने इस नोटिस को रद्द करने की मांग की है. AISA का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को रोकने की कोशिश है.
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली पुलिस ने 18 अक्टूबर 2026 को नेहा बोरा को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/130 और 135(3) के तहत नोटिस भेजा था. 17 अक्टूबर 2026 की तारीख वाले इस नोटिस में उन्हें 19 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे नई दिल्ली के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया था. नोटिस के मुताबिक, नेहा को जांच की अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड और एक जमानतदार देना था.
नेहा बोरा ने नोटिस को बताया असंवैधानिक
नेहा बोरा की याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस का नोटिस स्पष्ट नहीं है और उसमें दिए गए तथ्य सही नहीं हैं. याचिका में यह भी दावा किया गया है कि नोटिस संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन करता है. AISA के मुताबिक, नेहा की लीगल टीम इस मामले में जल्द सुनवाई की मांग करेगी. टीम हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई की मांग करने के साथ स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में भी पेश होगी. वहां नोटिस का जवाब दिया जाएगा और हाईकोर्ट में इसे चुनौती दिए जाने की जानकारी दी जाएगी.
पुलिस पर डराने और अधिकार को दबाने का आरोप
AISA ने आरोप लगाया है कि 16 अक्टूबर को हिरासत से रिहा होने के बाद से दिल्ली पुलिस के सादे कपड़ों में मौजूद जवान नेहा बोरा का पीछा कर रहे हैं. AISA का कहना है कि यह नोटिस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार को दबाने की कोशिश है. संगठन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए दिल्ली पुलिस पर BNSS की धारा 163 के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है.



















