कभी लकवे या स्ट्रोक के बाद हाथ-पैरों में दोबारा हरकत आना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता था. लंबे समय तक फिजियोथेरेपी, लगातार मेहनत और महीनों के इंतजार के बाद भी कई मरीज पूरी तरह ठीक नहीं हो पाते थे. लेकिन अब जयपुर के एसएमएस अस्पताल में इलाज की इस तस्वीर में तकनीक ने एक नया अध्याय जोड़ दिया है.
सवाई मानसिंह अस्पताल में शुरू हुई रोबोटिक फिजियोथेरेपी मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बन रही है. खास बात यह है कि यह रोबोट डॉक्टर की जगह नहीं लेता, बल्कि डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट के काम को और सटीक और आसान बनाता है.
इन बीमारियों में कर रहा मदद
एसएमएस अस्पताल के रीजनल रिहैबिलिटेशन सेंटर में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से रोबोटिक फिजियोथेरेपी की सुविधा शुरू की गई है. इसका फायदा खासतौर पर पैरालाइसिस, स्ट्रोक, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी और ब्रेन इंजरी से जूझ रहे मरीजों को मिल रहा है.
रोबोट ऐसे करता है काम
इलाज की शुरुआत डॉक्टर की जांच से होती है. मरीज की स्थिति और जरूरत को समझने के बाद फिजियोथेरेपिस्ट रोबोट में थेरेपी का पूरा प्रोग्राम सेट करता है. इसके बाद रोबोट डॉक्टर की योजना के मुताबिक मरीज के हाथ या पैर की एक्सरसाइज को बार-बार एक जैसी सटीकता के साथ कराता है.
इसलिए है बेहद खास
रोबोटिक थेरेपी की सबसे बड़ी खासियत इसकी लगातार काम करने की क्षमता है. इंसान लंबे समय तक एक ही मूवमेंट को बार-बार कराते हुए थक सकता है, लेकिन रोबोट बिना थके और बिना मूवमेंट में बदलाव किए एक्सरसाइज दोहरा सकता है.
डॉक्टरों का कहना है कि रोबोट इलाज का फैसला नहीं करता. मरीज की जांच, इलाज की दिशा और थेरेपी का फैसला डॉक्टर ही करते हैं. रोबोट सिर्फ तय की गई एक्सरसाइज को सटीक तरीके से दोहराने में मदद करता है. इस तकनीक का असर मरीजों में भी दिखाई देने लगा है. लंबे समय से चलने-फिरने में परेशानी झेल रहे कुछ मरीज अब हाथ-पैरों में पहले से ज्यादा हरकत महसूस कर रहे हैं.
‘रोबोटिक थेरेपी से हो रहा सुधार’
इलाज करा रहे मरीज अजय कुमार बताते हैं कि पहले शरीर बिल्कुल प्रतिक्रिया नहीं देता था, लेकिन लगातार थेरेपी के बाद अब उन्हें सुधार महसूस हो रहा है. उनके लिए यह रोबोट सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि सामान्य जिंदगी में वापस लौटने की उम्मीद है.
भविष्य में बढ़ाई जाएंगी मशीनें
फिलहाल अस्पताल में एक ही रोबोट उपलब्ध है, जबकि रोजाना बड़ी संख्या में मरीज फिजियोथेरेपी के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में डॉक्टर मरीज की जरूरत और स्थिति के आधार पर तय करते हैं कि किसे रोबोटिक थेरेपी दी जाए. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि भविष्य में जरूरत के अनुसार ऐसी और मशीनें लगाने पर विचार किया जाएगा.
मरीजों के लिए नई उम्मीद
कुल मिलाकर, एसएमएस अस्पताल में रोबोटिक फिजियोथेरेपी यह संदेश दे रही है कि भविष्य डॉक्टर बनाम मशीन का नहीं, बल्कि डॉक्टर और मशीन की साझेदारी का है. डॉक्टर का अनुभव और रोबोट की सटीकता मिलकर उन मरीजों के लिए नई उम्मीद बन रही है, जो दोबारा अपने पैरों पर खड़े होने का सपना देख रहे हैं.



















