राजस्थान हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर फर्जी जमानत आदेश अपलोड किए जाने के सनसनीखेज मामले में अब पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड थाने में धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. मामले में NDPS के आरोपी कलविंदर सिंह पनेसर पर अपने ही तीन जमानत आदेश कथित तौर पर फर्जी तरीके से तैयार कर हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करवाने का आरोप है. जानकारी के अनुसार, 26 अक्टूबर 2026 की तारीख का एक जमानत आदेश सामने आया था, जिसमें अफीम तस्करी के आरोपी कलविंदर सिंह पनेसर को जमानत दिए जाने का उल्लेख था.
हालांकि, जांच के दौरान हाईकोर्ट प्रशासन ने इस आदेश को फर्जी माना. इसके बाद वेबसाइट से आदेश हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई और पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई की तैयारी की गई.
आदेश की नंबरिंग और लोक अभियोजक के नाम से खुला संदेह
फर्जी आदेश को लेकर कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे उसकी प्रमाणिकता पर सवाल खड़े हुए. 26 अक्टूबर के आदेश का क्रमांक 15786/2026 बताया गया, जबकि उस समय तक जमानत प्रकरणों का क्रमांक 15050 तक ही पहुंचा था.
इसके अलावा आदेश में लोक अभियोजक के रूप में ए. शर्मा का नाम दर्ज था, जबकि हाईकोर्ट में इस नाम का कोई लोक अभियोजक नहीं होने की बात सामने आई. 12 और 15 अक्टूबर के कथित आदेश भी जांच के दायरे में आने की आशंका है.
8 किलो से अधिक अफीम बरामदगी का है मामला
कलविंदर सिंह पनेसर के खिलाफ श्रीगंगानगर के राजियासर थाना क्षेत्र में 24 नवंबर 2025 को NDPS एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी. आरोपी से 8 किलो 61 ग्राम अफीम बरामद होने की बात सामने आई थी. मई 2026 में पत्नी की तबीयत का हवाला देकर उसने हाईकोर्ट से 30 दिन की अंतरिम जमानत हासिल की थी.
जमानत अवधि पूरी होने के बाद भी आरोपी के जेल नहीं लौटने की जानकारी सामने आई. इसके बाद नियमित जमानत से संबंधित फाइल आरोपी का बेटा अधिवक्ता कैलाश खिलेरी से एनओसी लेकर वापस ले गया था.
पुलिस की कई टीमें कर सकती हैं दबिश
अब कुड़ी भगतासनी थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस अलग-अलग स्थानों पर दबिश देने की तैयारी कर रही है. जल्द ही पुलिस टीमें रवाना हो सकती हैं. इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर अंशुमन भोमिया स्वयं जांच की मॉनिटरिंग कर रहे हैं.
हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर फर्जी न्यायिक आदेश अपलोड होने का यह मामला न्यायिक व्यवस्था और साइबर सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर प्रकरण बन गया है. अब पुलिस जांच में यह सामने आना बाकी है कि फर्जी आदेश किसने तैयार किए, वेबसाइट पर किस माध्यम से अपलोड किए गए और इस पूरे कथित फर्जीवाड़े में अन्य कौन-कौन शामिल हैं.



















