राजनांदगांव। शासकीय कमलादेवी राठी स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय राजनांदगांव के वाणिज्य विभाग द्वारा वृत्तिक निर्देशन व व्यक्तित्व विकास विषय पर मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बसंत कुमार सोनबेर के व्याख्यान का आयोजन किया गया। संस्था प्राचार्य डॉ. सुमन सिंह बघेल ने छात्राओं को अपने कैरियर को निर्धारित कर तदानुसार अपनी व्यूहरचना तैयार कर लक्ष्य प्राप्ति करन हेतु प्रेरित किया। डॉ. बसंत कुमार सोनबेर द्वारा छात्राओं को कैरियर चयन हेतु बुद्धिमत्ता, रूचि, व्यक्तित्व, अभियोग्यता को ध्यान रखने हेतु प्रेरित किया गया। छात्राओं को अपनी रूचि के अनुसार विषय या व्यवसाय का चयन किया जाना चाहिए, क्योंकि दबावपूर्ण परिस्थितियों में लिए गए निर्णय उतने सफल नहीं हो पाते। उन्होंने व्यक्तित्व को बाहरी व आंतरिक दो भागों में समझाया कि बाह्य सुंदरता के साथ ही आंतरिक सुंदरता भी आवश्यक है। भाषा की प्रभाव पूर्णता, भाषा शैली, दैहिक भाषा, व्यक्तित्व में वृद्धि, सहनशीलता, समायोजन क्षमता, सादगी, सहजता, जवाबदेही आदि। संवेगात्मक बुद्धि से आशय उचित समय पर परिस्थति के अनुसार संवेगों को प्रकट करना चाहिए। उन्होंने कैटल महोदय के द्वारा बताए गए तीन घटकों को समझाया। उन्होने आत्मविकास के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जब किसी क्षेत्र में ज्ञान व अनुभव कम होता है तो हमारा आत्मविकास कमजोर होता है। उन्होंने बताया कि विपरित परिस्थितियों में समायोजन की क्षमता महिलाओं में अधिक होती है। हमारी पहचान सबसे अलग होती है हम में दूसरों से कुछ न कुछ अलग होता है। हम दूसरों से कितने अलग है इसका मूल्यांकन कर सकते है। उन्होंने बताया कि बुद्धिमता प्रत्येक व्यक्ति की अलग-अलग होती है। अपने कैरियर निर्धारण हेतु बुद्धि के स्तर को ज्ञात करने की महत्ता बताए। छात्राओं को रूचि के अनुसार अपने कैरियर का क्षेत्र चुनने के लिए प्रेरित किया। छात्राओं को अपनी अभियोग्यता को पहचाने, अपनी प्राथमिकता को पहचाने, दूसरो को देखकर अपनी प्राथमिकता का निर्धारण न करें। साथ ही समय सीमा का ध्यान रखकर प्राथमिकता का निर्धारण करें। उन्होंने छात्राओं को स्वोट अनालिसिस स्वॉट विश्लेषण करने प्रेरित किया। उन्होंने पुरूषों व महिलाओं की शारीरिक क्षमता, रूचि, प्रकृति, अभिवृत्ति, मानसिक स्थिति आदि में अंतरों का समझाया। उन्होंने छात्राओं को वेशभूषा, कर्तव्य परायणता, संवेगों की प्रस्तुति, मानवता व समाज हेतु कार्य करने की भावना, संवेदनशीलता, दैहिक भाषा, पोषक आहार व शारीरिक व्यायाम, नियमित दिनचर्या आदि का महत्व बताया जो कि व्यक्तित्व के विकास को प्रभावित करते है। वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ. लाली शर्मा के द्वारा छात्राओं को दृढ निश्चयी होने प्रेरित किया गया। डॉ. प्रज्ञा मिश्रा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।

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